कर्नाटक एमएलसी चुनाव: अपनों ने ही दिया धोखा; पूर्व केंद्रीय मंत्री बोले- ‘मैंने पार्टी को पहले ही चेताया था’

कर्नाटक MLC चुनाव में क्रॉस-वोटिंग से BJP में मचा बवाल: सदानंद गौड़ा का दावा- ‘मैंने पहले ही चेतावनी दी थी’

पूर्व मुख्यमंत्री बोले- चुनाव से पहले मिली थी गुप्त बैठक की जानकारी, पार्टी नेतृत्व को किया था सतर्क

कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव में सामने आई कथित क्रॉस-वोटिंग को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने दावा किया है कि उन्हें मतदान से पहले ही संभावित साजिश की जानकारी मिल गई थी और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को आगाह भी किया था, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

गौड़ा के इस बयान ने चुनावी हार, संगठनात्मक निगरानी और पार्टी के भीतर जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

चुनाव से पहले मिली थी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना

सदानंद गौड़ा ने बताया कि मतदान से कुछ दिन पहले उन्हें एक विश्वसनीय व्यक्ति से सूचना मिली थी कि शहर के एक आलीशान परिसर में कुछ नेताओं और अन्य लोगों की बैठक हुई है, जहां विधान परिषद चुनाव को लेकर चर्चा की गई।

उनके अनुसार सूचना देने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर उन्हें मामले की जानकारी दी थी और इसकी गंभीरता से जांच करने का अनुरोध किया था।

पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई थी जानकारी

गौड़ा ने कहा कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने भाजपा प्रदेश नेतृत्व से संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि तत्काल बातचीत नहीं हो सकी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और सतर्क रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पार्टी को संभावित नुकसान से बचाना था।

‘यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी’

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह चुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका था। इसी कारण उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही आगाह किया था कि विपक्षी दल हर संभव राजनीतिक रणनीति अपना सकते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सूचना देने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की।

चुनाव परिणामों ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में सात सीटों में से कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। सहयोगी जेडी(एस) अपनी निर्धारित सीट भी नहीं जीत सकी।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ विधायकों द्वारा अपेक्षा के विपरीत मतदान किए जाने से चुनावी समीकरण प्रभावित हुए। इसी वजह से क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं को बल मिला है।

‘पैसे के लिए पार्टी से गद्दारी हुई’

सदानंद गौड़ा ने चुनाव परिणामों पर निराशा जताते हुए कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि ने व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया है, तो यह मतदाताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ विश्वासघात है।

उन्होंने कहा कि जनता केवल क्रॉस-वोटिंग करने वालों से ही नाराज नहीं होती, बल्कि उन नेताओं से भी सवाल पूछती है जो संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने में विफल रहते हैं।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं पार्टी की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं।

धार्मिक स्थलों को राजनीति से दूर रखने की सलाह

क्रॉस-वोटिंग की जांच के लिए विधायकों से धार्मिक स्थल पर शपथ दिलाने के प्रस्ताव पर भी सदानंद गौड़ा ने आपत्ति जताई।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों का उपयोग राजनीतिक विवादों या आंतरिक जांच के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार राजनीति और आस्था को अलग-अलग रखना ही लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए बेहतर है।

BJP के सामने बढ़ी चुनौती

सदानंद गौड़ा के खुलासे के बाद भाजपा के भीतर संगठनात्मक अनुशासन, नेतृत्व की जवाबदेही और विधायकों की निष्ठा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब पार्टी की निगाह जांच प्रक्रिया और आगामी रिपोर्ट पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले में उठाए जाने वाले कदम भविष्य में कर्नाटक भाजपा की आंतरिक राजनीति और संगठनात्मक रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।


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